भारतीयों के लिए नौकरियों के अधिक अवसर.

भारतीयों के लिए नौकरियों के अधिक अवसर

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दिल्ली में मिडिल ईस्ट वर्कर्स और माइग्रेशन की विशेषज्ञ डॉक्टर महज़बीन बानू सऊदी अरब के इस क़दम का स्वागत करती हैं और वो इस बात को समझती हैं कि सऊदी अरब ये क़दम क्यों उठा रहा है.

वो कहती हैं, “तेल के गिरते दाम, महामारी और लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था और जॉब मार्केट में चुनौतियाँ और अनिश्चितता पैदा कर दी है.” उनके अनुसार ऐसी स्थिति में ये क़दम एक बहुत ही अच्छा आइडिया है. डॉक्टर महज़बीन बानू का तर्क ये है कि इससे हज़ारों नौकरियों के अवसर पैदा होंगे.

वो कहती हैं, “अर्थव्यवस्था को खोलने का मतलब है कि इस क्षेत्र में अधिक एफ़डीआई आएगा और नौकरियों के अवसर भी बढ़ेंगे. उदाहरण के लिए, क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की योजना शहर (रियाद) के आकार को दोगुना करने की है, जिसके लिए 800 अरब डॉलर का बजट है. निर्माण श्रमिकों सहित ज्ञान, कौशल और क्षमताओं जैसे विभिन्न क्षेत्रों के लिए ये आकर्षक लगता है.”

उनमें से 30 प्रतिशत कौशल की श्रेणी में आते हैं,

डॉक्टर महज़बीन बानू के मुताबिक़, सऊदी अरब में इस समय जितने भारतीय श्रमिक काम करते हैं (लगभग 28 लाख), उनमें से 30 प्रतिशत कौशल की श्रेणी में आते हैं, बाक़ी सब अर्ध-कुशल और अकुशल हैं.

वो कहती हैं, “सऊदी अरब के इस ऐलान से न केवल भारत के कुशल श्रमिकों को बल्कि अर्ध-कुशल और अकुशल लोगों को भी आकर्षित करने में मदद मिलेगी.”

भारत सरकार और राज्य सरकारों को उनकी सलाह ये है कि वो खाड़ी देशों से वापस लौटे श्रमिकों की ट्रेनिंग और स्किल डेवलपमेंट का इंतजाम करें, ताकि उन्हें सऊदी अरब की योजनाओं में नौकरियाँ मिलें.

श्रमिक भेजने वाले देशों के बीच मुक़ाबला सख़्त होगा. इसलिए वो श्रमिकों की ट्रेनिंग पर ज़ोर दे रही हैं. उनके अनुसार समाज और स्थानीय श्रम बाज़ार में सुधार सऊदी अरब के लिए एक चुनौती है.

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