'ओबीसी आरक्षण पिछड़ी जातियों के श्रेणीकरण में अब नहीं चलेगी मनमर्ज़ी'

‘ओबीसी आरक्षण पिछड़ी जातियों के श्रेणीकरण में अब नहीं चलेगी मनमर्ज़ी’

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दैनिक जागरण की ख़बर के मुताबिक, ”ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग को मिलने वाले आरक्षण के श्रेणीकरण को लेकर गठित रोहिणी आयोग राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मुद्दे को लेकर किसी जल्दबाजी में नहीं है.”

ख़बर में कहा गया है कि ”आयोग ने जो आँकड़े जुटाए हैं वे चौंकाने वाले हैं. इसके तहत ओबीसी में शामिल एक हजार से ज्यादा ऐसी जातियां हैं, जिन्हें इस आरक्षण का कोई लाभ नहीं मिल रहा है. आयोग अब इन्हीं तथ्यों और आँकड़ों के आधार पर राज्यों के साथ निर्णायक चर्चा की तैयारी में है.”

ख़बर के अनुसार, ”रोहिणी आयोग ने अगले महीने से देश के उन 11 राज्यों के साथ चर्चा शुरू करने की योजना बनाई है, जो पहले से ही अपने यहां अलग-अलग आधार पर ओबीसी आरक्षण का बँटवारा कर चुके हैं. खास बात यह है कि इन राज्यों में आरक्षण कोटे का बंटवारा किसी एक तय फार्मूले पर नहीं, बल्कि वोट बैंक के लिहाज से किया गया है. ऐसे में किसी राज्य में इसे दो श्रेणियों में बांटा गया है, तो किसी राज्य में तीन, चार और पांच श्रेणियों तक इसका बँटवारा किया गया है.”

रोहिणी आयोग का मानना है कि वह जुटाए गए आँकड़ों और तथ्यों के आधार पर ओबीसी आरक्षण के उप-वर्गीकरण के पक्ष में है और राज्यों के साथ चर्चा भी इसी आधार पर होगी.

भारत में फ़िलहाल ओबीसी की करीब 2600 जातियां हैं, जिनके लिए नौकरियों और दाख़िले में 27 फीसद आरक्षण है. इसके बावजूद पूरा आरक्षण ओबीसी की 600 जातियों में ही बंट जाता है. इनमें भी करीब 100 ऐसी जातियां है, जो इसका आधे से ज्यादा लाभ ले जाती हैं.

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